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Life Learnings -. 13 by KK Garg

Bhakat योगी  aur  भोगी भगत में तुम रस पाओगे  योगी को सूखा सूखा पाओगे भोगी में रस मिलता है लेकिन दुर्गन्ध युक्त  भोगी संसार को परमात्मा समझ लेता है  और परमात्मा को त्याग देता है योगी परमात्मा को संसार के विपरीत समझ लेता है और संसार को त्याग देता है भगत परमात्मा और संसार को एक ही मानता है इसलिए न कुछ त्यागता है न कहीं भागता है  भगत में योग और भोग का मिलन है   वह परम संगीत है  भगत जीवन की मधुशाला से होकर गुजरता है  वहां फूलों की सुगंध आती है भगत भागता नहीं संसार से  वह जहां है वहीं उस की मधुशाला  योगी में होश। भोगी में बेहोशी  भगत में दोनो   योगी भोगी दोनो उससे ईर्ष्या करेंगे  भगत इस परम बोध में है  की  सृष्टा इस सृष्टि के रोएं रोएं में समाया है (ओशो की माला के कुछ मोती ) प्रेम सहित

Life Learnings - 12 by KK Garg

                    Our Times Sharing a poem in Punjabi shared by a friend depicting the road on which we are travelling. Trying to write in  Dev Nagri and translate it in English also. Food for thought . लग्गी जे तेरे कालजे अज्जे  छुरी नहीं एह ना समझ की शहर दी हालत बुरी नहीं If you have not been stabbed in the heart yet do not think that the condition of the city is not bad वजदा बसंत राग जे है रेडियो  ते रोज मतलब ना लै की पौन खिजा दी तुरी नहीं If Media is singing the songs of Spring  daily  Do not think that air of Autumn has not started कुझ लोग समझदे ने बस एना कु राग नू सोने दी है जो बांसुरी तान बेसुरी नहीं Some people have only this much sense of music  That they think if the flute is of gold it must be the best music ( That some people think that whatever rich and powerful says must be the truth.) Luv & Regards KK Garg   

Life learnings- 11 By KK Gargसोनू

            नमों  नमों सोनू सूद ग़रीबों का मसीहा -  पुरानी ख़बर इंकम टैक्स रेड ऑन सोनू सूद- ताजा ख़बर यह कहाँ आ गए हम  यूँ ही  नमों नमों करते

Life Learnings-10 by KK Garg

                                मेरा तेरा      मैंने सुना था यहाँ मेरे तेरे रहते थे मेरे  तेरों से लड़ते थे तेरों को मार भगाते थे मैंने सोचा तेरे तो अब नहीं यहाँ क्या मेरे सुख से रहते हैं मैंने देखा अब मेरे  मेरों से लड़ते हैं फिर मेरा तेरा करते हैं 

Life Learnings-9 by KK Garg

                              दाने मैंने सुना था दाने दाने पे लिखा है खाने वाले का नाम मैंने देखा हर दाने पे लिखा है अदानी  अम्बानी

Life Learnings -8 by Prof. K K Garg

                                                                                                     मेरे मैं की यात्रा                         journey of My I   Lots of Learned responses have been received in response to my last write up on " When Right opposes Right" . (Life Learnings-7) I owe an explanation before we proceed further. "   Right opposes Right " was not about Farmers agitation versus Govt.  Agitation was used just as an illustration to highlight the consequences of an issue , between relations of two friends or relatives , because of their different view points or thoughts.  It was an effort to initiate a thought process ,that how...

Life Learnings - 7 by Prof. K K Garg

                                          when Right opposes Right  कई साल पहले की  बात है  मैं और मेरा दोस्त एक और दोस्त को मिलने गए। उसके घर कोई उसके  एक  दोस्त आए हुए थे, जो किसी यूनिवर्सिटी मैं में फिलॉसफी के प्रोफेसर थे। हम जब भी उसके घर जाते वोह प्रोफेसर हमेशा  बैठे दीखते थे।  हम बड़े हैरान होते थे की यह कुछ भी करते दिखाई  नहीं  देते ।और हम सोचते , शायद फिलॉसफी कोई बेकार चीज है। एक बार उनसे बात हुई ,तो उन्होंने एक ऐसी बात कही, जिससे हमें लगा की, करना ही सब कुछ नहीं होता, शायद विचार करना उससे भी आगे है।  हमने उनसे पूछा  कि  जीवन में ठीक और गलत का फैसला कैसे करें ,की कौन गलत है और कौन ठीक है।  उन्होंने कहा ठीक गलत में फैसला तो बहुत आसान  है ,पर मुश्किल तब आती है जब ठीक और ठीक एक दूसरे  के उलट खड़े होते हैं । पहली बार हमें लगा की यह खाली  दिखने वाले आदमी  ने कुछ  गहरी बात बताई है। और लगा ...