Life Learnings - 7 by Prof. K K Garg

                                          when Right opposes Right

 कई साल पहले की  बात है  मैं और मेरा दोस्त एक और दोस्त को मिलने गए। उसके घर कोई उसके  एक  दोस्त आए हुए थे, जो किसी यूनिवर्सिटी मैं में फिलॉसफी के प्रोफेसर थे। हम जब भी उसके घर जाते वोह प्रोफेसर हमेशा  बैठे दीखते थे।  हम बड़े हैरान होते थे की यह कुछ भी करते दिखाई  नहीं  देते ।और हम सोचते , शायद फिलॉसफी कोई बेकार चीज है। एक बार उनसे बात हुई ,तो उन्होंने एक ऐसी बात कही, जिससे हमें लगा की, करना ही सब कुछ नहीं होता, शायद विचार करना उससे भी आगे है।  हमने उनसे पूछा  कि  जीवन में ठीक और गलत का फैसला कैसे करें ,की कौन गलत है और कौन ठीक है। 

उन्होंने कहा ठीक गलत में फैसला तो बहुत आसान  है ,पर मुश्किल तब आती है जब ठीक और ठीक एक दूसरे  के उलट खड़े होते हैं। पहली बार हमें लगा की यह खाली  दिखने वाले आदमी  ने कुछ  गहरी बात बताई है। और लगा की विचार करना भी बहुत कुछ करना है, लेकिन उस का उदहारण पिछले दिनों समझ आया। 

 जब मेरे कुछ दोस्त मेरी  इस बात से नाराज हो गए कि   मैंने कोरोना  के कारण  लेबर के माइग्रेशन की पीड़ा का  वीडियो शेयर किया। या मैंने पिछले दिनों किसान आंदोलन के बारे में एक वीडियो शेयर किया । पहले मुझे समझ नहीं आया की यह मेरे साथ क्यों नाराज हैं ,जब की मैंने तो सिर्फ किसानो और मज़दूरों  का  दर्द  बाँटने की कोशिश की थी। मेरे वे  दोस्त जो मुझ से नाराज थे, बड़े अच्छे इंसान हैं  और मैं भी कोई बुरा इंसान नहीं हूँ।  फिर क्या बात है!

पिछले दिनों मेरे एक दोस्त का फ़ोन आया की उसका साला उसे मारने  को दौड़ा जब उसने किसानो की बात की। फिर एक और दोस्त का फ़ोन आया की उसका जीजा उससे बहुत नाराज हुआ जब उसने किसानो के कानूनों का फायदा बताया। मुझे अभी भी कुछ समझ नहीं आया। 

लेकिन कल  मेरा एक दोस्त आया जिसने सीधे तो नहीं पूछा  किसानो के बारे में।  उसने पूछा  कि  मैं टीवी में क्या देखता हूँ।  मैंने कहा मैं तो बहुत कम  टीवी देखता हूँ पर हाँ कभी कभी रवीश  का प्राइम टाइम देखता हूँ। उसके मुंह से निकला कि , जो भक्त  नहीं हैं  वो ही रवीश  का प्राइम  टाइम देखते हैं। इससे पहले मैं कुछ कहूं ,वोह उठ के चल दिया।  बिना चाय पिए। इधर चाय उस का इंतज़ार करती रही और मैं अपने दोस्त का। 

उस फिलॉसफी के प्रोफेसर की बात  कुछ कुछ समझ आ रही थी। 

क्या था यह 

ठीक     v/s   ठीक  

या  

विश्वास   v/s   विवेक 

या 

मैं  v/s  मैं 

क्या है यह मैं जो हमें हम नहीं होने देता ?  next time

Please Do share your Experiences.

Sharing my life learnings from "My corona Sanyas Meditations on Osho, Geeta, and I Ching Book Of Changes" .

With Hope Love and regards

Prof. K K Garg

      

Comments

  1. So beautiful ! Love the last line ! I vs We !
    I hope we can help create and birth that new earth 🌍 soon , where it’s all of us together - rising in love 💕

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  2. Muze lagta hai ki sab theek thak hai kehna hi theek hai 😊
    Loved it

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  3. We can discuss, discuss our perspective. Open mindedness is key to success in life, business and politics. "Only mera wala Blue is Blue" is not correct approach.

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  4. Bhoot khub soorat vichar
    Truth is Sanatan every where like Dharma There is no difference in mera tera

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