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Showing posts from December, 2020

Life Learnings -6 By Prof. K K Garg

   प्रेम से प्रार्थना की ओर                          F rom Love to Prayer                      life learnings -5  में हमने  बात की थी कि हम में दया कैसे पैदा हो    दया से करुणा की ओर   प्रेम की पहली सीढ़ी दया अगर हम पार कर जाएँ  तो  दूसरी सीढ़ी  पर कदम रख सकते हैं।  दूसरी सीढ़ी है करुणा । दया में हमारे अंदर प्रेम के अंकुर फूटते हैं जब दूसरा दुखी हो।  लेकिन करुणा वह प्रेम है जो आपके भीतर उठता है उन लोगों के लिए जो देखने में तो सुखी लगते हैं लेकिन उनके भीतर भी दुःख हैं। जो सिर्फ उनके बहुत करीबी लोगों को पता हैं।  जैसे आप  अपने बहुत करीबी लोग, जो देखने में बहुत सुखी लगते हैं  उनके दुःख भी जानते हैं। कामयाब, पर दुखी      यहाँ ऐसे लोग भी दुखी हो सकते हैं जो बाहर  से बहुत कामयाब दिखते  हैं। और  ऐसे लोग भी दुखी होते हैं जिनको अगर उनकी चाह  से  कम...

Life Learnings-5 by Prof. KK Garg

                  Steps of  Love and Courage       प्रेम और साहस की सीढ़ियां  जीवन में प्रेम , साहस और विचार के फूल न खिलें तो जीवन घृणा ,भय और अंध विश्वाससे भर  जाता है  कैसे अंकुरित हों ये बीज ?   कैसे भूमि तैयार हो ? सबसे पहले तो यह समझें की हम प्रेम के बीजों को कैसे रोकते हैं।    हम सब  प्रेम चाहते हैं दूसरों से , लेकिन प्रेम देने से  डरते हैं।अगर हम प्रेम देते भी हैं  तो सिर्फ इक्के दुक्के लोगों को। शायद     हम सब ने  हमेशा यही सुना है की  यहाँ प्रेम से कोई सुनता ही नहीं।इसलिए हमें हमेशा रोब और गुस्से से काम लेना चाहिए। इसलिए हम प्रेम के बीजों के  अंकुरित होने से डरते हैं।हमें यह लगता है की अगर हम प्रेम पूर्ण  हो गए तो इसका फायदा हमें नहीं दूसरों को मिलेगा। दूसरे  हमारा कहना नहीं मानेगे। दूसरे हमें कमजोर समझेंगे और   हमारा फायदा उठाएंगे।    हम यह भूल ही जाते हैं की फूल की सुगंध दूसरे...

Life Learnings - 4 by K K Garg

      कैसे होंगें प्रेम और साहस  के बीज अंकुरित ?                       How can we  grow  seeds of Love and Courage?   पुरानी  बात है एक व्यापारी तीर्थ यात्रा पर जा रहा था।  जाने से पहले उसने अपने  तीनो बेटों को बुलाया और हर एक को एक एक भरा हुआ  बोरा थमाते हुए   कहा की जब  मैं यात्रा से  वापिस आऊंगा तो मुझे वापिस दे देना।  व्यापारी एक साल बाद वापिस आया  तो बेटों से  बोरे  वापिस मांगे। पहला बेटा  बड़ा आज्ञाकारी था उसने बोरा बड़े सँभाल  कर रखा था  और वैसे का वैसा लौटा दिया ।  बाप ने देखा बोरे से दुर्गन्ध आ रही है, उसमें रखे  बीज तो  सड़ गए है ,अब  किसी काम नहीं आ सकते। बाप उदास हुआ की बेटा आज्ञाकारी  तो था,  परन्तु  बहुत नासमझ निकला।बेटे ने   विचार ही नहीं किया की बोरे में क्या है ,और क्या वह  खराब  तो नहीं हो जायेगा।    बाप ने  दू...

Life Learnings - 3- By K K Garg

                        क्या समाज चाहता है कि हम प्रेमपूर्ण हों                    Does Society wants us to be Loving or .... समाज का सम्बन्ध हमारे बाहर से है हमारे अंदर से नहीं।  समाज का सम्बन्ध  हमारे  साथ व्यव्हार तक है। समाज चाहता है की हमारा व्यवहार प्रेमपूर्ण दिखे ,चाहे वो प्रेम की  एक्टिंग हो ।    एक घटना से समझने की कोशिश करें  1974 की बात है। मैं  इंजीनियरिंग कॉलेज के फाइनल  ईयर में था।  इतवार का दिन था। हम हॉस्टल में मेस के बाहर कॉरिडोर में खड़े थे।  वहां पर एक ग्रुप हमारे सीनियर्स का भी खड़ा था जो एक साल ख़राब होने के कारण हमारे हॉस्टल में  ही था ।  इतने में हमने देखा की हॉस्टल वार्डन आ रहे हैं। वार्डन अभी थोड़ी दूर ही थे कि  हमारे एक सीनियर ने दूर से वार्डन  को हाथ जोड़े और    मुहं से गाली  निकाली धीरे से ,जो पास खड़े लड़कों ने सुनी।  पर वार्डन ने नह...