Life Learnings - 4 by K K Garg

 

   कैसे होंगें प्रेम और साहस  के बीज अंकुरित ?                    

How can we  grow  seeds of Love and Courage?

 पुरानी  बात है एक व्यापारी तीर्थ यात्रा पर जा रहा था।  जाने से पहले उसने अपने  तीनो बेटों को बुलाया और हर एक को एक एक भरा हुआ  बोरा थमाते हुए   कहा की जब  मैं यात्रा से  वापिस आऊंगा तो मुझे वापिस दे देना। 

व्यापारी एक साल बाद वापिस आया  तो बेटों से  बोरे  वापिस मांगे। पहला बेटा  बड़ा आज्ञाकारी था उसने बोरा बड़े सँभाल  कर रखा था  और वैसे का वैसा लौटा दिया ।  बाप ने देखा बोरे से दुर्गन्ध आ रही है, उसमें रखे  बीज तो  सड़ गए है ,अब  किसी काम नहीं आ सकते। बाप उदास हुआ की बेटा आज्ञाकारी  तो था,  परन्तु  बहुत नासमझ निकला।बेटे ने   विचार ही नहीं किया की बोरे में क्या है ,और क्या वह  खराब  तो नहीं हो जायेगा। 

  बाप ने  दूसरे  बेटे को बुलाया।   बेटे ने  वो बोरा बाप के जाते ही बेच दिया था और पैसे सँभाल  कर रख लिए थे। उसने पिता को वो पैसे  दिए और कहा " मैंने  सोचा था कि  कहीं बोरे  का सामान खराब  न हो जाये इसलिए बेच कर पैसे ले आया।" दूसरे  बेटे ने पहले से तो अच्छा काम किया था।   लेकिन  बाप को दुःख हुआ की बेटे  ने विचार तो किया किन्तु दूरद्रष्टा न था, न ही साहसी था।  कोई Risk नहीं ले सकता था। बिना साहस  के रिस्क नहीं लिया जा सकता।  और बिना रिस्क के जीवन में कोई Growth नहीं हो सकती। 

 अब तीसरे की बारी थी।  उसने बाप  को कहा बोरा  यहाँ नहीं है ,क्योंकि वो इतने ज्यादा हैं की वो घर नहीं ला सकता।  वो पिता को बाहर  अपने साथ  बाहर  ले आया जहाँ  फूल ही फूल थे और चारों  और सुगंध ही सुगंध फैल रही थी । पिता ने पूछा    बेटा  क्या किया तूने, "  बेटे ने कहा अपनी जो जमीन  बंजर पड़ी थी उसको साफ़ किया कंकड़ पत्थर निकाले  और बोरे  के बीज  बो दिए, फिर प्रेम  से इनकी सेवा  की , पानी दिया ,खाद डाली और धैर्य से फूल आने का इंतज़ार किया । अब इन फूलों से सैकड़ों  बोरे  बीज पैदा होंगे।  पिता तीसरे बेटे से खुश हुआ क्योंकि  उसमे प्रेम , साहस  , धैर्य और विचार करने   की शक्ति भी   है। 

क्या करते हैं हम बीजों का  

  प्रेम ,  साहस, धैर्य  और विचार करने के बीज जो  हमें जन्म  से  मिले है, हम में  से बहुत  से तो  पहले बेटे की तरह  उन्हें सम्हाल के रखते हैं और अंत तक  वो ख़राब हो जाते हैं और उनमें कोई अंकुर आने की सम्भावना ही नहीं रहती।

  कुछ दूसरे   बेटे की तरह बेचने की जल्दी करते हैं। उससे कुछ धन  कमा  लेते हैं। और बहुत कीमती बीज जिनसे बहुत फूल खिल सकते थे और जीवन   सुगन्धित और समृद्ध  हो सकता था  सस्ते में ही बेच देते हैं। और जीवन के फूलों से वंचित रह  जाते हैं। 

 कुछ हैं  तीसरे बेटे की तरह जो उन बीजो के लिए भूमि से  कंकड़ पत्थर साफ़ करते हैं, पानी देते हैं ,खाद डालते हैं। फिर  उन बीजों के पौधे बनते हैं  और उन पर फूल खिलते हैं जो खुद को भी सुगंध देते हैं और  जो पास से गुजरते  हैं उन्हें भी सुगन्धित करते हैं। और कई गुना  प्रेम ,साहस और विचार के बीज  पैदा करते हैं। वे अपने  ही नहीं औरों के अंदर पड़े प्रेम और साहस  के बीजों को भी विकसित करने का सबब बनते हैं।  

अगर हमअपने भीतर पड़े   प्रेम, साहस और विचार के बीज अंकुरित नहीं होने देंगे तो जीवन में घृणा, भय और अंध विश्वास की फसल काटनी पड़ेगी और जीवन  के फूल नहीं खिलेंगे  और एक ऐसा मौका जो सिर्फ मनुष्य जन्म  में ही मिल सकता है, खो जायेगा। 

कैसे तैयार  करें  हम अपने भीतर  की  भूमि को ,ताकि हममें प्रेम साहस और विचार के फूल खिल सकें ?


Sharing from my Corona sanyas Meditations on" Osho,Geeta and I Ching Book of Changes" in USA , for  Better living

With Hope Love & Regards

Prof. K K garg



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