Life Learnings -. 13 by KK Garg

Bhakat योगी  aur  भोगी

भगत में तुम रस पाओगे 

योगी को सूखा सूखा पाओगे

भोगी में रस मिलता है लेकिन दुर्गन्ध युक्त 

भोगी संसार को परमात्मा समझ लेता है

 और

परमात्मा को त्याग देता है

योगी परमात्मा को संसार के विपरीत समझ लेता है

और

संसार को त्याग देता है

भगत परमात्मा और संसार को एक ही मानता है

इसलिए न कुछ त्यागता है न कहीं भागता है 

भगत में योग और भोग का मिलन है  

वह परम संगीत है 

भगत जीवन की मधुशाला से होकर गुजरता है 

वहां फूलों की सुगंध आती है

भगत भागता नहीं संसार से 

वह जहां है वहीं उस की मधुशाला 

योगी में होश। भोगी में बेहोशी 

भगत में दोनो  

योगी भोगी दोनो उससे ईर्ष्या करेंगे 

भगत इस परम बोध में है 

की

 सृष्टा इस सृष्टि के रोएं रोएं में समाया है


(ओशो की माला के कुछ मोती )

प्रेम सहित







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