Life Learnings - 12 by KK Garg
Our Times
Sharing a poem in Punjabi shared by a friend depicting the road on which we are travelling. Trying to write in Dev Nagri and translate it in English also. Food for thought .
लग्गी जे तेरे कालजे अज्जे छुरी नहीं
एह ना समझ की शहर दी हालत बुरी नहीं
If you have not been stabbed in the heart yet
do not think that the condition of the city is not bad
वजदा बसंत राग जे है रेडियो ते रोज
मतलब ना लै की पौन खिजा दी तुरी नहीं
If Media is singing the songs of Spring daily
Do not think that air of Autumn has not started
कुझ लोग समझदे ने बस एना कु राग नू
सोने दी है जो बांसुरी तान बेसुरी नहीं
Some people have only this much sense of music
That they think if the flute is of gold it must be the best music
( That some people think that whatever rich and powerful says must be the truth.)
Luv & Regards
KK Garg
Beautifully written
ReplyDeleteमेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
ReplyDeleteपुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती
बैठे-बिठाए पकड़े जाना बुरा तो है
सहमी-सी चुप में जकड़े जाना बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नहीं होता
कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना बुरा तो है
जुगनुओं की लौ में पढ़ना
मुट्ठियां भींचकर बस वक़्त निकाल लेना बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नहीं होता
सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना
तड़प का न होना
सब कुछ सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर आना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना
सबसे ख़तरनाक वो घड़ी होती है
आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो
आपकी नज़र में रुकी होती है
सबसे ख़तरनाक वो आंख होती है
जिसकी नज़र दुनिया को मोहब्बत से चूमना भूल जाती है
और जो एक घटिया दोहराव के क्रम में खो जाती है
सबसे ख़तरनाक वो गीत होता है
जो मरसिए की तरह पढ़ा जाता है
आतंकित लोगों के दरवाज़ों पर
गुंडों की तरह अकड़ता है
सबसे ख़तरनाक वो चांद होता है
जो हर हत्याकांड के बाद
वीरान हुए आंगन में चढ़ता है
लेकिन आपकी आंखों में
मिर्चों की तरह नहीं पड़ता
सबसे ख़तरनाक वो दिशा होती है
जिसमें आत्मा का सूरज डूब जाए
और जिसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा
आपके जिस्म के पूरब में चुभ जाए
मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती
Written By
Paash