Life Learnings -2 - by K K Garg
Who Stops us being Loving
कौन रोकता है हमें प्रेम पूर्ण होने से
क्या प्रेम हमें जन्म से मिलता है - Are we loving by birth
जन्म से हमें प्रेम के बीज मिलते हैं और एहंकार का पौधा मिलता है। लेकिन हमारा सारा लालन पालन और शिक्षा का ढंग ऐसा है कि , उसमें प्रेम के बीज अंकुर नहीं बन पाते , बल्कि एहंकार का पौधा बड़ा होता रहता है और उसमें फल आने शुरू हो जाते हैं।
शिक्षा और प्रशिक्षण - Education and Training
प्रेम के फूल खिलने के लिए शिक्षा ( Education)की जरुरत है और जीवन यापन की तैयारी के लिए प्रशिक्षण ( Training ) की जरुरत है।
क्या पशु शिक्षित हो सकते हैं - Can animals be educated
नहीं सिर्फ मनुष्य ही शिक्षित हो सकता है। पशु का सिर्फ प्रशिक्षण यानि (Training) हो सकती है जैसे सर्कस के पशुओं की। सिर्फ मनुष्य के भीतर वो बीज हैं जिन्हें अंकुरित करने के लिए शिक्षा हो सकती है। शिक्षा ऐसे है जैसे कुआँ खोदना ताकि पानी निकले और प्रशिक्षण ऐसे है जैसे टंकी में पानी बाहर से भरना। शिक्षा से भीतर के फूल खिलते हैं।
मनुष्य को क्या चाहिए - What a man needs- Education or Training
मनुष्य के लिए शिक्षा( Education) और प्रशिक्षण(Training) दोनों चाहियें।
हमरे स्कूल कॉलेज शिक्षा के नाम पे हमें प्रशिक्षण देते हैं। और प्रशिक्षण का ढंग ऐसा है की उसमे हमारे एहंकार को बल मिलता है और प्रेम के बीज अंकुरित नहीं हो पाते।
कभी किसी परिवार का माहौल प्रेमपूर्ण हो या कोई टीचर प्रेम पूर्ण मिल जाये तो शिक्षा का माहौल बनता है। तब प्रेम और साहस के बीज अंकुरित होने की संभावना बनती है।
प्रशिक्षण में क्या गलती होती है - What is wrong in our Training
हमारा सारा सिस्टम ऐसा है की इसमें बच्चों में तुलना की जाती है।जबकि हर बच्चा जन्म से अपनी अपनी प्रतिभा लाता है। लेकिन हम सिर्फ ग्रेड को ही प्रतिभा मानते हैं । जो अच्छे ग्रेड लता है उसे पुचकारा जाता है और जो कम नंबर लता है उसे दुत्कारा जाता है।
अहंकार का बढ़ना और ईर्ष्या का जन्म - Birth of Ego and Jealousy
इससे जिसको हम पुचकारते हैं वो अपनेआप को खास समझने लगता है और उसका एहंकार बढ़ने लगता है और जिसे दुत्कारते हैं उसमें अंहकार ईर्ष्या का रूप लेने लगता है।
प्रेम शून्य व्यक्ति का जन्म - Birth of a love less Man
और इस तरह हम जीवन यापन के लिए बच्चों को तैयार तो कर देते हैं और एक फौज कड़ी कर देते हैं समाज में एहंकार और ईर्ष्या की। और एक ऐसा समाज और परिवार खड़ा कर लेते हैं जो प्रेम शुन्य है।
और फिर शुरू होती है प्रेम की मांग। सब मांग रहे है प्रेम एक दुसरे से .और प्रे म के फूल हमने खिलने नहीं दिए। फिर आपसी संबंध फीके फीके और तनाव में रहते हैं। और भीतर एक खालीपन।
खालीपन को भरने की दौड़ - Race to fill the Inner Hollowness
और फिर उस भीतरी खालीपन को भरने के लिए एक दौड़ शुरू होती है बाहर से चीजें इक्कठी करने की किसी भी कीमत पर। बिना जाने की अंदर की मांग बाहर की चीजों से पूरी नहीं हो सकती। प्रेम अंदर की मांग है और चीजें सारी बाहर है। भीतरी खालीपन तो नहीं मिटता। एहंकार और बढ़ता है और प्रेम से और दूर करता है।
क्या प्रेम और अहंकार इक्कठे रह सकते हैं,
Can Love and Ego survive together
प्रेम और एहंकार इकट्ठे नहीं रह सकते। फिर हमें कहा जाता है की एहंकार बुरा है इसे मारो , मैं को मारो। एहंकार को मारा नहीं जा सकता , सिर्फ जाना जा सकता है. एहंकार प्रकृति का दिया हुआ एक ऐसा जरुरी भाव है जिसका विज्ञानं समझे बिना सिर्फ इसका दुरुपयोग हो सकता है. इसका ज्ञान होने से तो प्रेम के बीज अंकुरित होने की सम्भावना बनती है।
या
प्रेम की साधना की जा सकती है जिससे प्रेम के बीज अंकुरित हों और उसमें फूल लगें।
क्या समाज चाहता है की मनुष्य प्रेमपूर्ण हो ?
क्या हमारे सम्बन्ध प्रेम पूर्ण हैं या प्रेम का दिखावा ?
क्या प्रेम की साधना की सीढियाँ हैं ?
From My Corona sanyas Meditations on Osho, Geeta , I Ching Book of Changes.... in USA
With Love Hope & Regards
K K garg
Yes its a very important article. Actually need of d time. Everybody wants to get love and is always looking for love from others. Whereas if you are loving by nature , your every action or gesture is welcomed by others. If a parent understands its ssignificance in d future of his or her child then even a dry parent would also love to make his or her child develop love in him. So its important to share this article at a bigger level with everyone. Actually people like to listen only from their master so called gurus. But they are never ready to listen from anyone in d society as everybody think s that he knows everything. So its important for all d masters to deliver such messages in these simple words. Being loving and being ready to serve others is d right solution to all d challenges in life. Please keep sharing such important although looking small but making life worthwhile . Thank you.
ReplyDeleteWaiting for more
Very profound ! Yes ego is necessary for our survival too and it protects but we need to be so aware that we do not let it hinder the blossoming of love! 🙏💕
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteBirds need no passports and know no boundaries .
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteI think we all have lost in the rat race of outer world to some extend and forgot to pursue our inner peace as our goal.
ReplyDelete