Life Learnings -6 By Prof. K K Garg
प्रेम से प्रार्थना की ओर
From Love to Prayer
life learnings -5 में हमने बात की थी कि हम में दया कैसे पैदा हो
दया से करुणा की ओर
प्रेम की पहली सीढ़ी दया अगर हम पार कर जाएँ तो दूसरी सीढ़ी पर कदम रख सकते हैं। दूसरी सीढ़ी है करुणा । दया में हमारे अंदर प्रेम के अंकुर फूटते हैं जब दूसरा दुखी हो। लेकिन करुणा वह प्रेम है जो आपके भीतर उठता है उन लोगों के लिए जो देखने में तो सुखी लगते हैं लेकिन उनके भीतर भी दुःख हैं। जो सिर्फ उनके बहुत करीबी लोगों को पता हैं। जैसे आप अपने बहुत करीबी लोग, जो देखने में बहुत सुखी लगते हैं उनके दुःख भी जानते हैं।
कामयाब, पर दुखी
यहाँ ऐसे लोग भी दुखी हो सकते हैं जो बाहर से बहुत कामयाब दिखते हैं। और ऐसे लोग भी दुखी होते हैं जिनको अगर उनकी चाह से कम फायदा हुआ हो तो उसको नुकसान मान कर दुखी होते हैं। यहाँ वह उपराष्ट्रपति जो राष्ट्रपति नहीं बन सका भी दुखी हो सकता है। और वह राष्ट्रपति जिसको दूसरी बार नहीं बनाया गया दुखी हो सकता है। या वह राष्ट्रपति जो प्रधान मंत्री बनना चाहता हो पर उसे राष्ट्रपति बना दिया गया हो । हो सकता है की इन लोगों के दुःख इनकी सोच की वजह से ही हों ,परन्तु हैं तो वोह दुखी ही।
ऐसे ही अगर आप यह समझ सकें की यहाँ जीवन में दुःख सब ओर है ,चाहे कोई कितना ही कामयाब क्यों न दिखता हो। अगर आप उनके प्रति भी दया भाव रख सकते हैं तो आप प्रेम की दूसरी सीढ़ी पार करेंगे।
इससे क्या फायदा होगा
इससे हम में ईर्ष्या के बीज नहीं पनपेंगे और घृणा के कांटे नहीं उगेंगे।क्योंकि ईर्ष्या हमें उनके बाहर के सुख सुविधा देखकर होती है। लेकिन जब हम उनके अंदर के दुःख सोच सकेंगे तो हमारे अंदर जो दया से प्रेम के बीज अंकुरित हुए थे उन्हें पौधा बनने में मदद मिलेगी और करुणा के फूल खिलने शुरू हो जायेंगे । और हम प्रेम की अगली सीढ़ी पर पहुँच सकेंगे। जहाँ हम सब मनुष्यों के प्रति प्रेमपूर्ण हो सकेंगे। हमें प्रेमपूर्ण होने में उनके दुःख देखने की जरूरत नहीं होगी। तब हम प्रेम के स्रोत होंगे और हमारा प्रेम प्रार्थना बनना शुरू हो सकेगा।
प्रेम से प्रार्थना की ओर
प्रार्थना वह प्रेम है, जो हम में से संसार के सब प्राणियों की ओर उमड़ेगा।वोह चाहे मनुष्य हों ,पशु पक्षी हों , वृक्ष और पौधे हों या चाँद तारे। यानि हम सारे अस्तित्व के प्रति प्रेम पूर्ण हो जायेंगे।
आओ दुआ करें की हमारा प्रेम प्रार्थना बने !
Sharing my life learnings from "My corona Sanyas Meditations on Osho, Geeta and I Ching Book Of Changes" in USA.
With Hope Love and regards
Prof. K K Garg
If the president or Prime minister comes to know that some one or all ate having pitty ,sympathy or karuna ot dya on them they will be most miserable in the world.I contradict on this example.. Ambiguous.If their staff ,most faithful staff says so ,think what will happen to them and their families.
ReplyDeleteKaruna should mean doung something exemplary.Give your clothes you are wearing to the needy,taking someoneinjured to hospital. Helping cases of attempted suicides of unknown .
If pm or president needs karuna ,country will be ruined .We are surrounded by China,Pakistan and terrorists.Karuna means doing duties sincely and helping.Please think over again.
Karuna ,dya or empathy is only for the handicapped,disabled or less capable persons .
ReplyDeleteReal incident.In a mini Olympics game,a short race comepetion was to start among physically handicapped children.All were wearing their bishakees.The race started A boy fell down.In less than half a second ,all children came to him ,made him stand and comfortable They forgot it was a race comepetion.They felt what the injured felt.Surpridingly ,all were declared toppers and given prizes .Standing applause.